
शनिवार, 31 अक्टूबर 2015
रविवार, 25 अक्टूबर 2015
शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2015
रविवार, 11 अक्टूबर 2015
After reading the poem ' Manbhavan Savan ' , read another poem related to rainy season
रिम-झिम, रिम-झिम वर्षा आई।
भीग रहे हैं पेड़ों के तन,
भीग रहे हैं आँगन उपवन,
हरियाली सबके मन भाई।
रिम-झिम, रिम-झिम वर्षा आई।।
मेंढक टर्र-टर्र चिल्लाते,
झींगुर मस्ती में हैं गाते,
आमों की बहार ले आई।
रिम-झिम, रिम-झिम वर्षा आई।।
आसमान में बिजली कड़की,
डर से सहमें लडका-लड़की,
बन्दर जी की शामत आई।
रिम-झिम, रिम-झिम वर्षा आई।।
कहीं छाँव है, कहीं धूप है,
इन्द्रधनुष कितना अनूप है,
धरती ने है प्यास बुझाई।
रिम-झिम, रिम-झिम वर्षा आई।।
विद्यालय भी तो जाना है,
होम-वर्क भी जँचवाना है,
मुन्नी छाता लेकर आयी।
रिम-झिम, रिम-झिम वर्षा आई।।
भीग रहे हैं पेड़ों के तन,
भीग रहे हैं आँगन उपवन,
हरियाली सबके मन भाई।
रिम-झिम, रिम-झिम वर्षा आई।।
मेंढक टर्र-टर्र चिल्लाते,
झींगुर मस्ती में हैं गाते,
आमों की बहार ले आई।
रिम-झिम, रिम-झिम वर्षा आई।।
आसमान में बिजली कड़की,
डर से सहमें लडका-लड़की,
बन्दर जी की शामत आई।
रिम-झिम, रिम-झिम वर्षा आई।।
कहीं छाँव है, कहीं धूप है,
इन्द्रधनुष कितना अनूप है,
धरती ने है प्यास बुझाई।
रिम-झिम, रिम-झिम वर्षा आई।।
विद्यालय भी तो जाना है,
होम-वर्क भी जँचवाना है,
मुन्नी छाता लेकर आयी।
रिम-झिम, रिम-झिम वर्षा आई।।
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